निशांत री कहाणियां

निशांत, पीलीबंगा

निशांत, पीलीबंगा

आज राजस्थानी कहाणी-जातरा जिण मुकाम माथै पूगी है, उण मुकाम नै हासिल करणवाळा कहाणीकारां री ओळ मांय कहाणीकार निशांत रौ नांव लिखणौ लाजमी लखावै। निशांत जी लांबै बगत सूं राजस्थानी अर हिंदी मांय कहाणियां-कवितावां अर बीजी रचनावां लिखता रैया है। इण संग्रै- “बींरौ आणौ अर जाणौ” री केई कहाणियां मांय कहाणीकार रौ हुनर आपां देख सकां, पण हरेक कहाणी हरेक री उम्मीद कद पूरी करै। इण ओळी नै आपां इण ढाळै ई अरथा सकां कै इण संग्रै री बगत-बगत माथै रचीजी आं कहाणियां मांय निशांत री सिरजण-जातरा रा केई उतार-चढाव निजर आवै। आं कहाणियां री मोटी खासियत आ है कै आपां आं नै किणी खास विचार-धारा री सींव मांय कोनी बांध सकां। असल मांय आं कहाणियां मांय बगत परवाण राजस्थान रै घर-समाज अर आपां रै असवाड़ै-पसवाड़ै री दुनिया रा केई सांच उकेरण वाळा चितराम निजर आवै।

किणी रचना री परख करती बगत उण नै उणरी परंपरा मांय देखणी चाइजै। निशांत री कहाणियां जठै बात परंपरा सूं जुड़्योड़ी लखावै, बठै ई आधुनिक काहाणी परंपरा रै मरम नै पिछाणती केई कहाणियां तौ भासा अर बुणगट री दीठ सूं इक्कीस लखावै। बात परंपरा रै मोह सूं मुगत कहाणियां री बात करां तौ कहाणी ‘‘अखबार पानै री चोरी” मांय छोटै सै घटना-प्रसंग परवांण कहाणीकार आपां नै आज रै जिण सांच सूं ओळखाण करावै बा काळजौ हिलावै जैड़ी है। बस जातरा मांय अखबार पानै री चोरी करण सूं सुरू हुई आ जातरा कहाणीकार देस-सुधार री बात सूं जोड़ैै । इण कहाणी मांय आपरी ठीमर भासा रै पाण निशांत जिकी जातरा करावै, बा बरसां लगा चेतै रैवै जैड़ी हुय जावै।

कैयौ जावै कै कहाणी बा सगळा सूं सिरै मानीजै जिकी नै जे आपां एक‘र बांच लेवां तौ उण रौ लखाव आपां रै अंतस मांय आपरा मांडणा मांडतौ रैवै। केई कहाणियां तौ इसी हुवै कै वां री संवेदना हियै रै आंगणै जाणै आसण लगा’र जम जावै। “नुमांइंदा” कहाणी नै बातपोसी अंदाज मांय कहाणीकार जिण ढाळै चालू करै अर जिण मुकाम माथै पूगावै बौ जसजोग है। किणी कहाणी नै मरम तांई पूगावण री तजबीज मांय कहाणीकार री कोई ओळी अणमाप असरदार हुय सकै, इण ओळी री साख मांय इणी कहाणी री छेहली ओळी आपां देख सकां। इण ओळी सूं अेक खास चरित्र रा रंग उतार‘र, उण रै होकड़ै नै लीरम्लीर करतौ कहाणीकार जाणै जनसेवकां रौ असली रूप चरूड कर देवै।

संवेदना री बुणगट सारू कहाणीकार निशांत कथा-भासा मांय अरथ पेटै रचाव रा नूंवा रंग रचतौ, इण संग्रै मांय ठेठ देसज केई केई सबदां रा सांवठा प्रयोग कर्या है। इयां लागै जाणै कै अठै आपां रै गुमियोड़ा सबदां री तपास करतौ कहाणीकार वांनै आसरौ देवै। सार रूप मांय निशांत कहाणी-परंपरा मांय आपरौ मारण काढण री खेचळ करता घणी-घणी आस उपजावै।

डॉ. नीरज दइया

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Posted on 04/05/2013, in आलोचना. Bookmark the permalink. टिप्पणी करे.

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