Posted by: Dr. Neeraj Daiya | 21/11/2017

सीताराम रूंगटा राजस्थानी साहित्य पुरस्कार

Neeraj Daiyaबीकानेर के डॉ. दइया को सीताराम रुँगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान

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कोलकाता। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा कला मंदिर सभागार में आयोजित 83वें स्थापना दिवस के उद्घाटनकर्ता एवं प्रमुख अतिथि, भारत के निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने सम्बोधन में मारवाड़ी समाज द्वारा दिये जा रहे जनकल्याण के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मारवाड़ से निकलकर मारवाडिय़ों का पहला प्रवास बंगाल में ही हुआ था। बंगाली एवं मारवाड़ी समुदाय के बीच मधुर सम्बन्धों एवं समरसता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 1952 के चुनाव में स्व. बसंतराय मुरारका बंगाल के उस क्षेत्र से चुनाव जीते, जहां एक प्रतिशत भी मारवाड़ी नहीं थे। यह समसरता का बहुत बड़ा उदाहरण है। कुरीतियों के उन्मूलन में मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किये जाने वाले प्रयासों की उन्होंने प्रशंसा की। सम्मानित अतिथि, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि देश में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां मारवाड़ी समाज के लोग न रहते हों। उन्होंने कहा कि आज यह समाज व्यापार के साथ-साथ कला, संस्कृति, साहित्य, तकनीक, शिक्षा एवं अन्यान्य क्षेत्रों में अपना विशिष्ट स्थान बनाकर देश की प्रगति में योगदान कर रहा है। इस समाज के सेठ जमनालाल बजाज एवं घनश्याम दास बिड़ला की स्वतंत्रता आंदोलन में आर्थिक भूमिका रही है।
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प्रमुख वक्ता सीताराम शर्मा ने पश्चिम बंगाल में मारवाड़ी समाज और सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर विस्तर से प्रकाश डाला। उन्होंने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों-राष्ट्रीय एकता, समाज सुधार और समरसता की बात कहते हुए बंगाल में मारवाडिय़ों के इतिहास का विस्तृत विवरण दिया।
विशिष्ट अतिथि, सांसद विवेक गुप्त ने सम्मेलन के 83वें स्थापना दिवस पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से प्रेषित शुभकामना का जिक्र करते हुए कहा कि मारवाड़ी दूध में चीनी की तरह हैं, जो कि बंगाल की संस्कृति में घुल-मिल गये हैं। उन्होंने वैवाहिक समारोह में मद्यपान निषेध को जायज ठहराते हुए समाज से इस कुरीति से परहेज करने की अपील की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज में पिछले कई दशकों में भारी बदलाव आया है। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति के साथ-साथ व्यापार-उद्योग में सुखद परिवर्तन घटा है, लेकिन सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों में गिरावट चिन्ता का विषय है।
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इस मौके पर सीताराम रुँगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान बीकानेर निवासी डॉ. नीरज दइया को प्रदान किया गया। पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरिप्रसाद कानोडिय़ा ने उन्हें श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के हाथों तथा केदारनाथ भागीरथी देवी कानोडिय़ा राजस्थानी भाषा बाल साहित्य सम्मान के तहत राजस्थान के सोजत शहर निवासी अब्दुल समद राही को पूर्व अध्यक्ष रामअवतार पोद्दार ने श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर प्रकाशित सम्मेलन के मुखपत्र समाज विकास का विमोचन निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने तथा सम्मेलन की वर्तमान सत्र की सदस्यता डायरेक्टरी का विमोचन राज्यपाल के हाथों ओम प्रकाश अग्रवाल ने करवाया।
इसके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने राज्यपाल, फाईनेन्स कमेटी के चेयरमैन आत्माराम सोन्थलिया ने श्री मुखर्जी, प.बंग सम्मेलन के अध्यक्ष नन्दकिशोर अग्रवाल ने सांसद विवेक गुप्त तथा उत्कल प्रदेश के अध्यक्ष अशोक जालान ने सीताराम शर्मा तथा अन्य मंचस्थों का राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री दिनेश जैन एवं दामोदर प्रसाद विदावतका, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाशपति तोदी ने बुके, मेमेन्टो प्रदान कर तथा साफा पहनाकर स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन स्वागत कमेटी के चेयरमैन संतोष सराफ तथा कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री शिव कुमार लोहिया ने किया। सुनीता लोहिया एवं टीम द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान से कार्यक्रम का शुभारम्भ एवं समापन हुआ।
दूसरे सत्र में नई दिल्ली से पधारे अविष्का लोकमंच के कलाकारों द्वारा पेश किये गये रंगारंग राजस्थानी कार्यक्रम के तहत श्री राम स्तुति, धरती धोरां री, चरी नृत्य, मंजीर नृत्य, घूमर, डम-डम बाजे ढोल, कालबेलिया नृत्य के साथ सुरेश चन्द्र व्यास द्वारा पेश किये भवई नृत्य की लोगों ने दिल खोलकर तारीफ की। इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने किया। कार्यक्रम के दौरान कलामंदिर का सभागार खचाखच भरा हुआ था। पश्चिम बंगाल के अलावा, उड़ीसा, झारखण्ड, बिहार से भी सदस्य पधारे। कुल मिलाकर स्थापना दिवस समारोह लोगों के जेहन में एक अमिट छाप छोड़ गया।
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अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन का स्थापना दिवस समारोह

बंगाली एवं मारवाड़ी समुदाय के बीच है समरसता-प्रणव मुखर्जी

मारवाड़ी समाज की देश की प्रगति में महत्पूर्ण योगदान-राज्यपाल

कोलकाता। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा कला मंदिर सभागार में आयोजित 83वें स्थापना दिवस के उद्घाटनकर्ता एवं प्रमुख अतिथि, भारत के निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने सम्बोधन में मारवाड़ी समाज द्वारा दिये जा रहे जनकल्याण के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मारवाड़ से निकलकर मारवाड़ियों का पहला प्रवास बंगाल में ही हुअा था। बंगाली एवं मारवाड़ी समुदाय के बीच मधुर सम्बन्धों एवं समरसता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 1952 के चुनाव में स्व. बसंतराय मुरारका बंगाल के उस क्षेत्र से चुनाव जीते, जहां एक प्रतिशत भी मारवाड़ी नहीं थे। यह समसरता का बहुत बड़ा उदाहरण है। कुरीतियों के उन्मूलन में मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किये जाने वाले प्रयासों की उन्होंने प्रशंसा की। सम्मानित अतिथि, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि देश में एेसा कोई स्थान नहीं है जहां मारवाड़ी समाज के लोग न रहते हों। उन्होंने कहा कि आज यह समाज व्यापार के साथ-साथ कला, संस्कृति, साहित्य, तकनीक, शिक्षा एवं अन्यान्य क्षेत्रों में अपना विशिष्ट स्थान बनाकर देश की प्रगति में योगदान कर रहा है। इस समाज के सेठ जमनालाल बजाज एवं घनश्याम दास बिड़ला की स्वतंत्रता अांदोलन में अार्थिक भूमिका रही है।
प्रमुख वक्ता सीताराम शर्मा ने पश्चिम बंगाल में मारवाड़ी समाज अौर सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर विस्तर से प्रकाश डाला। उन्होंने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों-राष्ट्रीय एकता, समाज सुधार अौर समरसता की बात कहते हुए बंगाल में मारवाड़ियों के इतिहास का विस्तृत विवरण दिया।
विशिष्ट अतिथि, सांसद विवेक गुप्त ने सम्मेलन के 83वें स्थापना दिवस पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अोर से प्रेषित शुभकामना का जिक्र करते हुए कहा कि मारवाड़ी दूध में चीनी की तरह हैं, जो कि बंगाल की संस्कृति में घुल-मिल गये हैं। उन्होंने वैवाहिक समारोह में मद्यपान निषेध को जायज ठहराते हुए समाज से इस कुरीति से परहेज करने की अपील की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज में पिछले कई दशकों में भारी बदलाव अाया है। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति के साथ-साथ व्यापार-उद्योग में सुखद परिवर्तन घटा है, लेकिन सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों में गिरावट चिन्ता का विषय है।
इस मौके पर सीताराम रुँगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान बीकानेर निवासी डॉ. नीरज दइया को प्रदान किया गया। पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरिप्रसाद कानोड़िया ने उन्हें श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के हाथों तथा केदारनाथ भागीरथी देवी कानोड़िया राजस्थानी भाषा बाल साहित्य सम्मान के तहत राजस्थान के सोजत शहर निवासी अब्दुल समद राही को पूर्व अध्यक्ष रामअवतार पोद्दार ने श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर प्रकाशित सम्मेलन के मुखपत्र समाज विकास का विमोचन निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने तथा सम्मेलन की वर्तमान सत्र की सदस्यता डायरेक्टरी का विमोचन राज्यपाल के हाथों अोम प्रकाश अग्रवाल ने करवाया।
इसके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने राज्यपाल, फाईनेन्स कमेटी के चेयरमैन अात्माराम सोन्थलिया ने श्री मुखर्जी, प.बंग सम्मेलन के अध्यक्ष नन्दकिशोर अग्रवाल ने सांसद विवेक गुप्त तथा उत्कल प्रदेश के अध्यक्ष अशोक जालान ने सीताराम शर्मा तथा अन्य मंचस्थों का राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री दिनेश जैन एवं दामोदर प्रसाद विदावतका, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाशपति तोदी ने बुके, मेमेन्टो प्रदान कर तथा साफा पहनाकर स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन स्वागत कमेटी के चेयरमैन संतोष सराफ तथा कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री शिव कुमार लोहिया ने किया। सुनीता लोहिया एवं टीम द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान से कार्यक्रम का शुभारम्भ एवं समापन हुअा।
दूसरे सत्र में नई दिल्ली से पधारे अविष्का लोकमंच के कलाकारों द्वारा पेश किये गये रंगारंग राजस्थानी कार्यक्रम के तहत श्री राम स्तुति, धरती धोरां री, चरी नृत्य, मंजीर नृत्य, घूमर, डम-डम बाजे ढोल, कालबेलिया नृत्य के साथ सुरेश चन्द्र व्यास द्वारा पेश किये भवई नृत्य की लोगों ने दिल खोलकर तारीफ की। इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने किया। कार्यक्रम के दौरान कलामंदिर का सभागार खचाखच भरा हुअा था। पश्चिम बंगाल के अलावा, उड़ीसा, झारखण्ड, बिहार से भी सदस्य पधारे। कुल मिलाकर स्थापना दिवस समारोह लोगों के जेहन में एक अमिट छाप छोड़ गया।

ABMS 25-12-17


बंगाली व मारवाड़ी समुदाय के बीच है समरसता
कोलकाता : अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा कला मंदिर सभागार में आयोजित 83वें स्थापना दिवस के उद्घाटनकर्ता पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में मारवाड़ी समाज द्वारा दिये जा रहे जनकल्याण के कार्यों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि मारवाड़ से निकल कर मारवाड़ियों का पहला प्रवास बंगाल में ही हुअा था. बंगाली एवं मारवाड़ी समुदाय के बीच मधुर संबंधों एवं समरसता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 1952 के चुनाव में स्वर्गीय बसंतराय मुरारका बंगाल के उस क्षेत्र से चुनाव जीते, जहां एक प्रतिशत भी मारवाड़ी नहीं थे.
यह समसरता का बहुत बड़ा उदाहरण है. कुरीतियों के उन्मूलन में मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किये जानेवाले प्रयासों की उन्होंने प्रशंसा की.
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि देश में एेसा कोई स्थान नहीं है, जहां मारवाड़ी समाज के लोग न रहते हों. उन्होंने कहा कि आज यह समाज व्यापार के साथ-साथ कला, संस्कृति, साहित्य, तकनीक, शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में अपना विशिष्ट स्थान बनाकर देश की प्रगति में योगदान कर रहा है.
इस समाज के सेठ जमनालाल बजाज एवं घनश्याम दास बिड़ला की स्वतंत्रता अांदोलन में अार्थिक भूमिका रही है. प्रमुख वक्ता सीताराम शर्मा ने पश्चिम बंगाल में मारवाड़ी समाज अौर सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों-राष्ट्रीय एकता, समाज सुधार अौर समरसता की बात कहते हुए बंगाल में मारवाड़ियों के इतिहास का विस्तृत विवरण दिया.
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज में पिछले कई दशकों में भारी बदलाव अाया है. शिक्षा, साहित्य, संस्कृति के साथ-साथ व्यापार-उद्योग में सुखद परिवर्तन घटा है, लेकिन सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है.
इस मौके पर सीताराम रुंगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान बीकानेर निवासी डॉ नीरज दइया को प्रदान किया गया. पूर्व अध्यक्ष डॉ हरिप्रसाद कानोड़िया ने उन्हें श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के हाथों तथा केदारनाथ भागीरथी देवी कानोड़िया राजस्थानी भाषा बाल साहित्य सम्मान के तहत राजस्थान के सोजत शहर निवासी अब्दुल समद राही को पूर्व अध्यक्ष रामअवतार पोद्दार ने श्रीफल, शाल, मानपत्र तथा निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.
इस मौके पर प्रकाशित सम्मेलन के मुखपत्र समाज विकास का विमोचन श्री मुखर्जी के हाथों राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने तथा सम्मेलन के वर्तमान सत्र की सदस्यता डायरेक्टरी का विमोचन राज्यपाल के हाथों अोम प्रकाश अग्रवाल ने करवाया.
इसके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला ने राज्यपाल, फाईनेंस कमेटी के चेयरमैन अात्माराम सोन्थलिया ने श्री मुखर्जी, पश्चिम बंग सम्मेलन के अध्यक्ष नंदकिशोर अग्रवाल ने सांसद विवेक गुप्त तथा उत्कल प्रदेश के अध्यक्ष अशोक जालान ने सीताराम शर्मा तथा अन्य मंचस्थों का राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री दिनेश जैन एवं दामोदर प्रसाद विदावतका, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कैलाशपति तोदी ने बुके, मेमेंटो प्रदान कर तथा साफा पहनाकर स्वागत किया.
धन्यवाद ज्ञापन स्वागत कमेटी के चेयरमैन संतोष सराफ तथा कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री शिव कुमार लोहिया ने किया. सुनीता लोहिया एवं टीम द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगान से कार्यक्रम का शुभारंभ एवं समापन हुअा.
दूसरे सत्र में नयी दिल्ली से पधारे अविष्का लोकमंच के कलाकारों द्वारा पेश किये गये रंगारंग राजस्थानी कार्यक्रम के तहत श्री राम स्तुति, धरती धोरां री, चरी नृत्य, मंजीर नृत्य, घूमर, डम-डम बाजे ढोल, कालबेलिया नृत्य के साथ सुरेश चंद्र व्यास द्वारा पेश किये भवई नृत्य की लोगों ने दिल खोलकर तारीफ की.
इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हरलालका ने किया. कार्यक्रम के दौरान कलामंदिर का सभागार खचाखच भरा हुअा था. पश्चिम बंगाल के अलावा, ओड़िशा, झारखंड, बिहार से भी सदस्य पधारे.
अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन का 83वां स्थापना दिवस समारोह कलामंदिर कोलकता में
बीकानेर के डॉ. नीरज दइया सम्मानित होंगे
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी की विशेष उपस्थिति में उद्घाटन करेंगे निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी


कोलकता/ अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन का 83वां स्थापना दिवस समारोह सोमवार 25 दिसम्बर को कलामंदिर सभागार कोलकता में मनाया जाएगा। प्रातः 10.45 बजे आयोजित इस समारोह में पश्चिम बंगल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी सम्मानित अतिथि होंगे तथा भारत के निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी प्रधान अतिथि के रूप में समारोह का उद्घाटन करेंगे। समारोह में मुख्य वक्ता सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बेलारूस गणराज्य के मानद कंसुल सीताराम शर्मा होंगे तथा समारोह के विशिष्ट अतिथि सांसद विवेक गुप्ता होंगे।
सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रह्लादराय अगरवाला स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। समारोह में सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष नंदलाल रूंगटा, डॉ. हरिप्रसाद कानेडिया, रामअवतार पोद्दार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे। समारोह में मूर्धन्य साहित्यकार बीकानेर राजस्थान निवासी डॉ. नीरज दइया को सीताराम रूंगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान एवं प्रतिभाशाली साहित्यकार के रूप में सोजत शहर के अब्दुल समद राही को केदारनाथ भागीरथी देवी कानोड़िया राजस्थानी भाषा बाल साहित्य पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत आविष्का लोक कला मंच नई दिल्ली के कलाकारों द्वारा विश्व प्रसिद्ध राजस्थानी लोक नृत्य-गायन एवं संगीत का रंगारंग कार्यक्रम होगा। कलामंच के कलाकारों ने देश विदेश में राजस्थानी संस्कृति का परचम लहराया है।
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डॉ. नीरज दइया संक्षिप्त बायोडाटा
डॉ. नीरज दइया का जन्म 22 सितम्बर, 1968 रतनगढ़ (चूरू) राजस्थान में हुआ। कवि, आलोचक, व्यंग्यकार, अनुवादक और संपादक के रूप में राजस्थानी और हिंदी साहित्य में डॉ. नीरज दइया एक जाना-पहचाना और विश्वसनीय नाम है। आपको लेखन के संस्कार अपने स्वर्गीय पिता श्री सांवर दइया से मिले जो राजस्थानी के प्रख्यात कवि-कहानीकार माने जाते हैं। डॉ. नीरज दइया ने बी.एससी. के बाद हिंदी और राजस्थानी साहित्य में एम.ए. किया और बी.एड., नेट, स्लेट, पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक पाठ्यक्रम भी किया। आपने “निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में आधुनिकता बोध” विषय पर शोध किया और वर्तमान में आप केंद्रीय विद्यालय संगठन में पी.जी.टी. (हिंदी) के पद पर सेवारत हैं। आपकी दो दर्जन से अधिक पुस्तकें राजस्थानी और हिंदी में प्रकाशित हुई है। राजस्थानी कविता और आलोचना में विशेष कार्य करने वाले डॉ. नीरज दइया ने अनुवाद, संपादन और व्यंग्य विधा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्ष 1989  में अपाकी पहली कृति भोर सूं आथण तांई लघुकथा संग्रह के रूप में सामने आई और वर्ष 2017 में आपकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हुई है। ‘साख’, ‘देसूंटो’ और ‘पाछो कुण आसी’ जैसे काव्य कृतियों के कवि डॉ. नीरज दइया की आलोचना विधा में ‘आलोचना रै आंगणै’ और ‘बिना हासलपाई’ कृति बेहद चर्चित और प्रशंसित हुई है। आपने राजस्थानी भाषा में अमृता प्रीतम, निर्मल वर्मा, भोलाभाई पटेल, नंदकिशोर आचार्य और सुधीर सक्सेना जैसे महत्त्वपूर्ण रचनाकारों की कृतियों का अनुवाद किया हैं वहीं राजस्थानी के युवा कवियों की कविताओं का संपादित संग्रह ‘मंडाण’ राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी से प्रकाशित हुआ है। आपने साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के लिए नेशनल बिब्लियोग्राफी ऑफ इंडियन लिटरेचर हेतु राजस्थानी भाषा के लिए कार्य किय है तो अकादमी की मासिक पत्रिका ‘जागती जोत’ का संपादन भी किया है। आप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर में राजस्थानी साहित्य परामर्श मंडल के संयोजक भी रहें हैं। इंटरनेट पर ‘कविता कोश’ राजस्थानी-विभाग के सहायक सम्पादक डॉ. नीरज दइया को साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा राजस्थानी बाल साहित्य पुरस्कार एवं राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं सस्कृति अकादेमी, बीकानेर से अनुवाद पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों मान-सम्मानों से नवाजा जा चुका है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. नीरज दइया को राजस्थानी भाषा-साहित्य की श्रीवृद्धि में विशिष्ट योगदान हेतु ‘सीताराम रूंगटा राजस्थानी भाषा-साहित्य सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।

– अभिलाष दुबे

25-12-17 Kolkatta


कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया को अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन, कोलकत्ता का ‘सीताराम रूंगटा राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान’ सोमवार 25 दिसम्बर को सम्मेलन के 83 वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। सम्मेलन के सचिव एस.के. लोहिया ने बताया कि यह सम्मान राजस्थानी भाषा की श्रीवृद्धि हेतु प्रतिवर्ष राजस्थानी साहित्यकार को स्व. सीताराम रूंगटा की स्मृति में अर्पित किया जाता है। इस वर्ष के लिए डॉ. नीरज दइया को उनकी सुदीर्घ साहित्य सेवाओं के लिए कोलकत्ता में आयोजित समारोह में 21 हजार रुपए का चैक, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न एवं सम्मान-पत्र देकर पुरस्कृत किया जाएगा।
सरोकार के सचिव नवनीत पाण्डे ने बताया कि डॉ. नीरज दइया को यह सम्मान उनकी राजस्थानी साहित्य में कविता, आलोचना, बाल साहित्य, अनुवाद एवं संपादन के क्षेत्र में श्रीवॄद्धि के लिए घोषित हुआ है। राजस्थानी और हिंदी में समान रूप से साहित्य सृजन करने वाले डॉ. दइया की इस वर्ष सात पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और उन्हें अनेक पुरस्कार-सम्मान मिले हैं जिसमें साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन मावली प्रसाद श्रीवास्तव सम्मान, कागद सम्मान, नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान, खींव राज मुन्नीलाल सोनी पुरस्कार, मनोहर मेवाड़ राजस्थानी साहित्य सम्मान, सुरजाराम जालीवाला सृजन पुरस्कार, दीपचंद जैन साहित्य पुरस्कार आदि प्रमुख है।
(नवनीत पाण्डे)
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