Posted by: Dr. Neeraj Daiya | 28/11/2017

नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान

साहित्य के माध्यम से सम्भव हैं मानवीय मूल्यों का संरक्षण – बादल

 डॉ नीरज दइया नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान से सम्मानित

कालू ( लूणकरनसर )/ 27 दिसम्बर/ ऐसे विकट समय में जब संवेदना की धारा सूखती जा रही हैं, साहित्य ही मानवीय मूल्यों के पोषण का माध्यम बन सकता है, ये उद्गार प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मंगल बादल ने व्यक्त किए। डॉ. बादल मंगलवार को कालू के मां जगदम्बा यात्रिगृह सभागार में नानूराम संस्कृर्ता साहित्य सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के जीवन में व्याप्त अविश्वास और तनाव से निजात पाने के लिए साहित्य के पठन-पाठन को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ. मदन सैनी ने कहा कि नानूराम संस्कर्ता ने ग्रामीण जीवन के सुख-दुख का जो अंकन किया हैं, वह बेजोड़ है। इस समारोह में डॉ. नीरज दइया को उनके राजस्थानी काव्य संग्रह ‘पाछो कुण आसी’ के लिए नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया। पुरस्कार के तहत डॉ. दइया प्रशस्ति पत्र, श्रीफल, शॉल, प्रतीक चिह्न, व पत्रम् पुष्पं अर्पित किए गए।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि राजस्थानी कहानी को स्थापित करने में संस्कर्ता का अवदान मील का पत्थर है, विशिष्ट अतिथि प्रमोद कुमार चमोली ने कहा कि नई पीढ़़ी को साहित्यिक विरासत से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। कार्यक्रम की शुरूवात मंचासीन अतिथियों द्वारा साहित्यकार नानूराम संस्कर्ता के तेल-चित्र पर माल्यापर्ण एवं पुष्पार्पण से की गई। कथाकार-कवि डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने नानूराम संस्कर्ता के साहित्यिक अवदान पर पत्रवाचन किया। कवि कहानीकार नवनीत पाण्डे ने राजस्थानी भाषाऔर साहित्य की चर्चा करते हुए डॉ. नीरज दइया के अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी में सबसे अधिक दूर तक पहचाने जाने वाले रचनाकार हैं। जगदीश प्रसाद सोनी ने सम्मानित होने वाले कवि डॉ. नीरज दइया का परिचय देते हुए पुरस्कृत काव्य-कृति ‘पाछो कुण आसी’ पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि ये कविताएं अपने प्रयोगों द्वारा कविता में बदलाव की सूचना भी देती है। कार्यक्रम में डॉ. गजादान चारण ने नानूराम संस्कर्ता के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर रामजीलाल घोड़ेला, डॉ गौरीशंकर, राजेन्द्र जोशी, उपसंरपच हजारीराम सारस्वत, सुरेश कुमार डूढ़ाणी, रामचन्द्र पुरोहित ने भी विचार व्यक्त किए।
आयोजन समिति की ओर से शिवराज संस्कर्ता ने सभी आगंतुकों का आभार जताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों द्वारा नानूराम जी के कार्यों को विस्तार दिए जाने का विश्वास दिलाया। आयोजकों की ओर से मंचासीन अतिथियों का मार्ल्यापण कर प्रतीक चिह्न भेंट कर अभिन्नदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि राजूराम बिजारणियां ने किया। समारोह में पूर्व संरपच रामकुमार सारस्वत, महाजन संरपच प्रतिनिधि सद्दाम हुसैन, उपसंरपच कमल संस्कर्ता, अधिवक्ता महिपाल सारस्वत, प्रधानाचार्य ओंकारनाथ योगी, कोषाधिकारी बजरंग शर्मा, चैनरूप सोनी, मालचन्द जोशी सहित बड़ी संख्या में कालू तथा आसपास के ग्रामों से गणमान्य जन मौजूद रहे।

लूणकरनसर/ 24 नवम्बर 16/ नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान समिति की ओर से प्रतिवर्ष प्रदत्त ख्यातनाम साहित्यकार साहित्य महोपाध्याय नानूराम संस्कर्ता की स्मृति में ‘राजस्थानी साहित्य सम्मान’ के क्रम में इस बार बीकानेर के कवि डा. नीरज दइया को उनकी काव्य-कृति ‘पाछो कुण आसी’ के लिए दिया जाएगा। सम्मान समिति के संयोजक साहित्यकार रामजीलाल घोड़ेला एवं शिवराज संस्कर्ता ने बताया कि तीन स्वतंत्र निर्णायकों की ने साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मदन सैनी, वरिष्ठ उदघोषक व गजलकार राजेश चड्ढा तथा कवि-कथाकार डॉ. मदन गोपाल लढ़ा शामिल थे।

डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने बताया कि सम्मानित साहित्यकार डॉ. नीरज दइया राजस्थानी और हिंदी के वरिष्ठ कवि-आलोचक के रूप में पहचाने जाते हैं। आपकी विविध विधाओं में अब तक बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कविता, आलोचना और अनुवाद में समान गति रखने वाले डॉ. दइया को साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा बाल साहित्य लेखन, राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा अनुवाद कार्यों हेतु पुरस्कृत किया जा चुका है और इसी वर्ष रॉटरी क्लब द्वारा उन्हें आलोचना पुस्तक बिना हासलपाई पर राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदत्त किया गया है। सम्मान समिति के संयोजक साहित्यकार रामजीलाल घोड़ेला ने बताया कि डॉ. नीरज दइया ने नेगचार से संपादक के रूप में निराली पहचान बनाई तथा राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के लिए 55 युवा कवियां री कवितावां का संपादक ‘मंडाण’ उनका उल्लेखनीय कार्य है। डॉ. दइया वर्तमान में कविता कोश के अलाव अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं और फिलहाल वे बीकानेर के केंद्रीय विद्यालय में व्याख्याता हिंदी के पद पर सेवारत हैं।

शिवराज संस्कर्ता ने बताया कि यह सम्मान पूर्व में राजस्थानी के साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी, कवयित्री मोनिका गौड़, व्यंग्यकार नागराज शर्मा, निबंधकार डॉ कृष्णलाल बिश्नोई को अर्पित किया जा चुका है। इस बार डॉ. दइया को माह दिसम्बर में यह सम्मान भव्य समारोह ग्राम कालू में आयोजित कर अर्पित किया जाएगा। डॉ. नीरज दइया को ‘नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान’ की घोषणा पर युवा रचनाकार राजूराम बिजारणिया, कमल किशोर पिंपलवा, जगदीश नाथ भादू, नंदकिशोर शर्मा, राजकुमार गोगिया आदि ने खुशी जताई है।

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