Posted by: Dr. Neeraj Daiya | 22/02/2018

रोटरी क्लब, बीकानेर द्वारा पुरस्कार-2016

Neeraj Daiya

बीकानेर/ 21 अक्टूबर 2016 / टोवेगो और ट्रिनीडॉड में भारत के पूर्व राजदूत एवं जोधपुर के पूर्व नरेश महाराजा गजसिंह ने कहा कि राजस्थानी भाषा का दुनिया की भाषाओं में विशेष स्थान है तथा देश ही नहीं विदेशों में प्रवासीजन इस भाषा का प्रयोग करते हैं। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने से इस भाषा की नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही इसी भाषा के साहित्य, फिल्मांकन के साथ ही बच्चों को प्राथमिक स्तर पर इस भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
श्री गजसिंह रोटरी क्लब, बीकानेर के तत्वावधान में दो दिवसीय राज्य स्तरीय राजस्थानी भाषा पुरस्कार एवं सम्मान समारोह मंे गुरुवार को संपन्न कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उनके कर कमलों से डॉ. देव कोठारी, उदयपुर को 51 हजार रूपये का ‘‘कला डूंगर कल्याणी राजस्थानी शिखर पुरस्कार’’ प्रदान किया गया। साथ ही बीकानेर के साहित्याकर डॉ. नीरज दईया को 21 हजार रूपये का ‘‘खींवराज-मुन्नीलाल सोनी, राजस्थानी गद्य पुरस्कार’’ डीडवाना के डॉ. गजादान चारण को 11 हजार रूपये का ‘‘बृज-उर्मी अग्रवाल राजस्थानी पद्य पुरस्कार’’ तथा उदयपुर की डॉ. नीता कोठारी को ‘‘किरण चंद नाहटा स्मृति’’ राजस्थानी भाषा सम्मान प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि ने बताया कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिये बरसों से प्रयास किये जा रहे है। इसी कारण राजस्थान विधान सभा मंे संकल्प पारित हो सका। आशा है सभी आवाज उठायेंगे तो संवैधानिक मान्यता मिलने में जरूर कामयाबी मिलेगी और इस भाषा को सही सम्मान मिल सकेगा।
राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रयासों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘मारवाड़ रत्न‘‘ सम्मान की शुरुआत की गई है तथा इससे सम्मानित श्री देव किशन राजपुरोहित हमारे बीच उपस्थित है। इस भाषा के साहित्य के संरक्षण के लिये डिजीटलाइजेशन भी करवाया गया है।
श्री गजसिंह ने जोधपुर एवं बीकानेर के प्राचीन संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि अब भी अच्छे पुन्यसी हेत है। यहां के महाराजा गंगासिंह का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भय है तथा महाराजा सार्दुल सिंह एवं जोधपुर से भी अच्छे संबंध रहे। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए रोटरी क्लब बीकानेर इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने पूर्व रोटेरियन होने के अपने जोधपुर तथा टावेगो-ट्रिनीडॉड के अनुभवों की चर्चा करते हुए विश्वास दिलाया कि वे अन्य रोटरी क्लबों में ऐसे सम्मान समारोह हो इसका प्रयास किया जायेगा।
समारोह की विशिष्ट अतिथि एवं जोधपुर की पूर्व महारानी हेमलता राजे ने कहा कि राजस्थानी भाषा दुनिया की किसी भी भाषा की तुलना में अच्छी भाषा है। यहां के मीराबाई के भजन एवं करमाबाई भक्ति की प्रसंग के साथ भाषा मंे बहुत ही ‘अपनायत’ है। उन्होंने कहा कि उनके देश एवं विदेशों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यहां की सभ्यता, संस्कृति एवं भाषा मंे हीरे, माणक एवं मोती जड़े हुए है।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस भाषा की मान्यता के लिए वे महाराजा गजसिंह के पीछे जोर लगाने में पीछे नहीं रहेगी तथा इस भाषा के साहित्य एवं भाषा को मिटने नहीं देंगे।
समारोह के अध्यक्ष श्री बिट्ठल दास मूंधड़ा ने राजस्थानी भाषा को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये इसे परिवार में अपनाये जाने, आपसी संवाद बढ़ाने, राजस्थान की सभ्यता, संस्कृति एवं संस्कार जीवन पद्धति में अपनाये जाने की जरूरत है।
श्री मूंधड़ा ने इसके लिये भीतरी विचार परिवर्तन पर बल देते हुए कहा कि राजस्थानी का संस्कृति कोष एवं इनसाइक्लोपीडिया तैयार किया जाना चाहिये। इनके प्रकाशन की व्यवस्था उनकी संस्था करेगी। उन्होंने ‘‘वैचारिकी’’ पत्रिका में राजस्थानी साहित्यकारों के परिचय एवं रचनाएं प्रकाशन पर भी विश्वास दिलाया।
उन्होंने कवि सम्मेलन, प्रस्तुत ओजस्वी गीत, कविताआएं तथा मीठास लिए हुए काव्य रचनाओं की सराहना की तथा डॉ. गजादान सहित सभी रचनाकारों को बधाई दी।
सम्मानित साहित्यकारों की ओर से डॉ. देव कोठारी ने आभार ज्ञापित करते हुए विश्वास व्यक्त किया इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा एवं प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने प्राचीनतम राजस्थानी साहित्य बहुबलि घोर आदि की चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. सीताराम लालस के शब्द कोष में दो लाख शब्द है। राजस्थानी के पंरपरागत हस्त उद्योग एवं अन्य क्षेत्रों से इतने शब्द और उपलब्ध है। डॉ. ब्रज मोहन जावलिया के इस दिशा में एक कोष प्रकाशन की चर्चा करते हुए डॉ. कोठारी ने राजस्थानी के तुकांत गद्य रचनाओं की भी जानकारी दी।
अपने स्वागत भाषण में समारोह के संयोजक श्री अरुण प्रकाश गुप्ता ने बीकानेर की संस्कृति एवं अपनत्वता को महत्वपूर्ण बताया तथा कहा कि रोटरी क्लब अपने सेवा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के साथ भाषा-साहित्य सर्जन के क्षेत्र में भी आगे लाया है। ऐसे में हमें पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करना है।
श्री मनमोहन कल्याणी ने समारोह की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला तथा सभी अतिथियों का स्वागत किया। क्लब के अध्यक्ष श्री प्रदीप लाट ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं इस समारोह के सहयोगियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। श्री किशोर सिंह राजपुरोहित ने कार्यक्रम का संचालन किया।


रोटरीक्लब, बीकानेर द्वारा वर्ष 2016 के लिए राजस्थानी भाषा और साहित्य संबंधी वार्षिक पुरस्कार एवं सम्मान की घोषणा…
रोटरीक्लब, बीकानेर द्वारा वर्ष 2016 के लिए राजस्थानी भाषा और साहित्य संबंधी वार्षिक पुरस्कार एवं सम्मान की घोषणा शनिवार को की गई। रोटरी के अध्यक्ष प्रदीप लाट ने बताया कि रोटेरी क्लब द्वारा “कला डूंगर कल्याणी” राजस्थानी शिखर पुरस्कार उदयपुर के डॉ. देव कोठारी को घोषित किया गया है जिसके तहत उन्हें 51 हजार का नगद पुरस्कार दिया जाएगा।
राजस्थानी गद्य साहित्य की उत्कृष्ट कृति का “खींव राज मुन्नीलाल सोनी” राजस्थानी गद्य पुरस्कार बीकानेर के कवि- आलोचक डॉ. नीरज दइया को उनकी कृति “बिना हासलपाई” पर प्रदान किया जाएग। इसके तहत डॉ. दइया को 21 हजार रुपयों का नकद पुरस्कार मिलेगा। राजस्थानी काव्य की उत्कृष्ट कृति का ब्रज उर्मी अग्रवाल” राजस्थानी पद्य पुरस्कार 11 हजार रुपये का नगद पुरस्कार डीडवाना के डॉ. गजादान चारण को उनकी काव्य कृति “अखरावता आखर” पर प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति सेवा के लिए प्रथम “किरण चंद नाहटा सम्मान” उदयपुर की नीता कोठारी को प्रदान किया जाएगा।
जिसके तहत उन्हें 5 हजार रुपये का नगद सम्मान प्रदान किया जाएगा। निर्णायक समिति में शामिल रतनशाह, कोलकाता, नारायण सिंह पीथल, जयपुर, शिवराज भारतीय नोहर, डॉ. लक्ष्मीकांत व्यास अजमेर, डॉ. उमाकांत गुप्त बीकानेर, वीरेंद्र लखावत सोजतसिटी, डॉ. मंगत बादल रायसिंहनगर, शिवराज छंगाणी बीकानेर, डॉ. भंवर कसाना डीडवाना भंवरलाल भ्रमर बीकानेर से प्राप्त प्राप्तांकों के आधार पर यह पुरस्कार घोषित किए गए।
संयोजक अरूण प्रकाश गुप्ता ने बताया कि यह पुरस्कार 19 20 अक्टूबर को रोटेरी क्लब, बीकानेर में आयोजित समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
बिना हासलपाई है राजस्थानी भाषा आलोचना की संदर्भ कृति
कवि-आलोचकडॉ. नीरज दइया की वर्ष 2014 में प्रकाशित राजस्थानी कहानी आलोचना पर केंद्रित आलोचना कृति बिना हासलपाई वस्तुत: राजस्थानी कहानीकारों का नए दृष्टिकोण से मूल्यांकन करती कृति है। कृति में 25 आलेखों के जरिए 1970 के बाद की कहानियों कहानीकारों पर गंभीर आकलन किया गया है। साहित्यकार नंद भारद्वाज के अनुसार इस कृति में कहानीकारों को नए दृष्टिकोण से परखा गया है वहीं कवि भवानी शंकर व्यास विनोद ने इस कृति को राजस्थानी आलोचना क्षेत्र में प्रामाणिक उपयोगी संदर्भ पुस्तक माना है। साहित्यकार देवकिशन राजपुरोहित कहते है यह कृति राजस्थानी आलोचना विद्या के सभी पक्षों को सामने रखने वाली परख करती वो कृति है जो राजस्थानी कहानी को नया नजरिया देती है।
जिस तारीख को पुस्तक का विमोचन, उसी दिन पुरस्कार
यहसंयोग है कि डॉ. दइया की कृति बिना हासलपाई का विमोचन 24 सितम्बर 2014 को हुआ था। 24 सितम्बर को ही इस कृति पर पुरस्कार की घोषणा हुई है। कृति को पुरस्कार मिलने की घोषणा पर साहित्यकार बुलाकी शर्मा, आनंद वि. आचार्य, हरीश बी.शर्मा, नवनीत पांडे, राजेन्द्र जोशी, आईदान सिंह भाटी, गजेसिंह राजपुरोहित, अर्जुनदान चारण, प्रेमचंद गांधी, मदनगोपाल लढ्ढा, रमाकांत शर्मा, घनश्याम कच्छावा, वली माे.गौरी कृति का कवर डिजाइन करने वाले कुवंर रविन्द्र ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

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