Posted by: Dr. Neeraj Daiya | 08/06/2018

घिर घिर चेतै आवूंला म्हैं

GHIR GHIR CHETE AAUVLA MEN Dr Neeraj Daiya

घिर घिर चेतै आवूंला म्हैं (2018) डॉ. संजीव कुमार री टाळवीं कवितावां / संचै-अनुसिरजण : नीरज दइया / प्रकाशक : ज्योति प्रकाशन, बीकानेर / पाना : 96 / कीमत : 150/-
BOOK Pdf  Ghir Ghir Chetai Avoonla Mhain

फ्लैप : डॉ. मंगत बादल

Mangat Badalअनुवाद विग्यान रै साथै अेक कला भी है। इण सारू अनुवादक री दोनूं भासावां माथै गैरी पकड़ होवणी लाजमी मानीजै। अनुवाद फगत सबदां रो नीं विसय-वस्तु री आतमा रो हुया करै। अनुवादक नै मूळ री गैराई में उतरनै उण री आतमा मांय पैठ’र जायजो लेवणो हुवै, जद ई खरोखरी कोई अनुवाद सफळ हुवै। कवि संजीव कुमार री हिंदी कवितावां री पोथ्यां सूं आं टाळवीं कवितावां रो ‘घिर घिर चेतै आवूंला म्हैं’ सिरैनांव सूं अनुवाद करता थकां डॉ. नीरज दइया आं कवितावां री आतमा तांई ऊंडा पूग्या है। डॉ. नीरज दइया कवि री कवितावां रै मारफत उण री आतमा मांय उतर’र उणां रै भावां नै राजस्थानी सबद दिया अर वां री निजू लकब सूं अै कवितावां खास बणगी है। केई बार अनुवादक जाणकारी रै अभाव मांय मूळ भासा रै सबद रो प्रयोग कर लेवै। इण सूं पाठक साथै जाड़ हेठै आयोड़ै कांकरै सरीखी हुवै। अनुवादक डॉ. नीरज दइया इण बात रो बरोबर ध्यान राख्यो है कै कवितावां साथै पूरो न्याव हुवै, ओई’ज कारण है कै अै कवितावां अनूदित नीं लाग’र मूळ राजस्थानी सरीखी लागै। आ इण अनुवाद री खासियत है। इण सारू घणा-घणा रंग।
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० भूमिका :डॉ. मदन गोपाल लढ़ा

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