साहित्य अकादेमी पुरस्कार- 2017 पुस्तिका

डॉ. नारायणसिंह भाटी अनुवाद सम्मान

Neeraj Daiya

कथा अलंकरण समारोह-2018
जाने-माने उपन्यासकार और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय, समारोह के अध्यक्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के चेयरमैन व प्रख्यात साहित्यकार प्रोफेसर अर्जुन देव चारण, विशिष्ट अतिथि समकालीन हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कथाकार-उपन्यासकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट, विशिष्ट अतिथि ‘कथादेश’ साहित्यिक पत्रिका के संपादक हरिनारायण, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार-कवि फ़ारूक आफरीदी, कथा संस्थान के संस्थापक सचिव कवि-कहानीकार मीठेश निर्मोही द्वारा सुप्रतिष्ठ लेखक एवं अनुवादक डॉ. नीरज दइया (बीकानेर) को नंदकिशार आचार्य की हिन्दी से राजस्थानी में अनूदित काव्य-कृति “ऊंडै अंधारै कठैई” के लिए “डॉ. नारायणसिंह भाटी अनुवाद सम्मान” से अलंकृत किया गया।
जोधपुर 02 सितम्बर, 2018

Neeraj Daiya 01

Katha Samman

कथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान जोधपुर की ओर से राज्य स्तरीय कथा अलंकरण की शृंखला में इस वर्ष लेखक एवं अनुवादक डॉ. नीरज दइया (बीकानेर) यानी मुझे को नंदकिशोर आचार्य की हिंदी से राजस्थानी में अनूदित काव्य कृति ‘ऊंडै अंधारै कठैई’ पर ‘डॉ. नारायणसिंह भाटी अनुवाद सम्मान’ घोषित हुआ है। संस्था के सचिव कवि-कहानीकार मीठेश निर्मोही के अनुसार अनुवाद-सम्मान के निर्णायक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अर्जुनदेव चारण (जोधपुर), कुंदन माली (उदयपुर) और डॉ. मदन सैनी (बीकानेर) रहे हैं।
कथा संस्थान परिवार और निर्णायकों का बहुत-बहुत आभार।

Patrika Jodhpur03-01-2018

साहित्य अकादेमी मुख्य पुरस्कार 2017

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Festival of Letters 2018 (12-17 February 2018) Programme Hightlights

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बीकानेर के साहित्यकार डॉ.नीरज दइया को वर्ष-2017 के केंद्रीय साहित्य अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया जाएगा
बीकानेर | बीकानेरके साहित्यकार डॉ.नीरज दइया को वर्ष-2017 के केंद्रीय साहित्य अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा गुरुवार को की गई है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी राजस्थानी आलोचना कृति ‘बिना हासलपाई’ पर दिया जाएगा। गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय साहित्य अकादमी की पुरस्कार चयन कमेटी की बैठक में विभिन्न भारतीय भाषाओं में दिए जाने वाले सर्वोच्च पुरस्कारों की घोषणा के तहत राजस्थानी भाषा में डॉ.दइया को पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई। 12 फरवरी 2018 को नई दिल्ली में केंद्रीय साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित साहित्योत्सव के दौरान डॉ.दइया को ताम्र फलक और एक लाख की नगद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया जाएगा। राजस्थानी भाषा में सर्वोच्च पुरस्कार के लिए गठित निर्णायक समिति में साहित्यकार डॉ.देव कोठारी, डॉ.कल्याण सिंह शेखावत और शिवराज छंगाणी शामिल थे। बीकानेर के लिए यह गौरव की बात है कि लगातार तीन सालों से बीकानेर के राजस्थानी साहित्यकारों को केंद्रीय साहित्य अकादमी की आेर से राजस्थानी भाषा की सर्वश्रेष्ठ कृति पर दिए जाने वाले सर्वोच्च पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2015 में मधु आचार्य ‘आशावादी’ के राजस्थानी उपन्यास ‘गवाड़’ और वर्ष 2016 में बुलाकी शर्मा के राजस्थानी कहानी संग्रह ‘मरदजात अर दूजी कहाणियां’ को सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।

Duniya In Dino jan18

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NEWS Letters  हिंदी 12-02-18 ; 13-02-18 ; 14-02-18 अंग्रेजी 12-02-18 ; 13-02-18 ; 14-02-18

NEWS13-02-2018

गौरीशंकर कमलेश स्मृति पुरस्कार

Gauri Shankar Kamalesh Purskar 2017


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कोटा इस वर्ष 2017 का प्रतिष्ठित गौरीशंकर कमलेश स्मृति राजस्थानी भाषा पुरस्कार बीकानेर के कवि-आलोचक डा. नीरज दइया को उनकी राजस्थानी काव्य-कृति “पाछो कुण आसी” के लिए अर्पित किया जाएगा। ज्ञान भारती संस्था के सचिव सुरेन्द्र शर्मा एडवोकेट ने आज इसकी घोषणा की, उन्होंने बताया कि काव्य विधा अंतर्गत यह पुरस्कार पूर्व में डा. भगवती व्यास, श्याम महर्षि, अम्बिकादत्त आदि को प्रदान किया जा चुका है। संस्था की निदेशक श्रीमती कमला कमलेश ने बताया कि पुरस्कार एवं सम्मान समारोह शनिवार 23 दिसम्बर को ज्ञान भारती संस्था इन्द्रा मार्केट की नई बिल्डिंग में प्रात 11 बजे स्व. गौरीशंकर कमलेश स्मृति राजस्थानी भाषा पुरस्कार एवं सम्मान समारोह 2017 के अंतर्गत आयोजित होगा। इस सम्मान के अंतर्गत डा. दइया को रु11.000 नकद, सम्मान पत्र, शाल एवं श्रीफल भेंट कर संस्था द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

पुरस्कार समिति के सचिव जितेंद्र निर्मोही ने बताया कि डा. नीरज दइया राजस्थानी एवं हिन्दी दोनों भाषाओं में समान रूप से विगत तीन दशक से सक्रिय हैं। निर्मोही ने कहा कि डा. दइया नये तेवर के राजस्थानी भाषा के समालोचक हैं जिन्हें अनेक पुरस्कार एंव मान-सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। निर्णयाक समिति के अनुसार पुरस्कृत कृति “पाछो कुण आसी” में विगत से जुड़े रहकर नई चुनौतियों का सामना करने की संभावनाओं को तलाश करती कविताएं है। जो राजस्थानी माटी से जुड़कर विश्व मानवता से अपने भावक को जोड़ती है।इस उपलब्धि पर क्षेत्र के साहित्यकारों ने प्रसन्नता प्रकट की है।

 

फ्रेंड्स एकता संस्थान सम्मान

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बीकानेर के युवा साहित्यकार वली मोहम्मद गौरी साहब के जुनून का नतीजा है कि फ्रेंड्स एकता संस्थान की जानिब से हर वर्ष शहीदे आज़म अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान हसरत वारसी की याद में यादगार कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, वली साहब, साथी नदीम अहमद नदीम और इनके सभी मित्रों के जज़्बे को सलाम। कार्यक्रम में आज राजस्थानी साहित्य के लिए सम्मान और वह भी आदरणीय श्री भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’, श्री मधु आचार्य ‘आशावादी’, श्री राजेन्द्र जोशी और जनाब गुलाम मोहिउद्दीन माहिर से हाथों प्रेरणास्पद है। बहुत बहुत आभार।


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मनोहर मेवाड़ राजस्थानी साहित्य सम्मान

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राजसमन्द। राव मनोहरसिंह स्मृति न्यास आईडाणा एवं साकेत साहित्य संस्थान आमेट की ओर से कला साहित्य संस्कृति संगीत एवं पत्रकारिता में प्रतिवर्ष दिये जाने वाले नामों की घोषणा चयन समिति की अनुशंषा के आधार पर स्मृति न्यास के अध्यक्ष भगवतसिंह पारस ने की।
भगवतसिंह पारस ने बताया कि इस वर्ष का मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान हिन्दी में श्री फतहलाल गुर्जर अनोखा कांकरोली, उर्दू में खुर्शीद अहमद शेख ‘खुर्शीद‘ उदयपुर, राजस्थानी में डॉ. नीरज दइया बीकानेर, संस्कृत में डॉ0 कुसुमलता टेलर उदयपुर, पत्रकारिता में भागीरथसिंह पत्रकारिता गौरव पुरुस्कार श्री गणपतलाल जाट संवाददाता आईडाणा को प्रदान किया जाएगा। चयन समिति में प्रकाश तातेड़, डॉ. श्रीकृष्ण जुगनु, माधव नागदा, विजय सिंह राव, ने साहित्यकारों का वरियता क्रम से चयन किया है।
सम्मान समारेाह समिति के संयोजक नारायणसिंह राव ने कहा कि सम्मानित होने वाले प्रतिभाओं को सात हजार एक सौ नकद एवं प्रशस्ति पत्र के साथ स्मृति चिह्न देकर दिसम्बर 2016 माह में आयोजित मेधा मिलन पर्व-6 में सम्मानित किया जाएगा।
इससे पूर्व साहित्यकार प्रकाश तातेड़, माधव नागदा, चतुर कोठारी, त्रिलोकी मोहन पुरोहित डॉ. श्रीकृष्ण जुगनु, डॉ. करुणा दशोरा, रीना मेनारिया, भेरु सिंह राव क्रान्ति, डॉ. बस्तीमल सोलंकी, डॉ. मुरलीधर कन्हैया व डॉ. शक्ति कुमार शर्मा को हिन्दी राजस्थानी एवं संस्कृत में उत्कृष्ट साहित्य सृजन, आयोजन एवं प्रकाशन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों से सम्मानित किया जा चुका है।
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राजस्थानी साहित्य के लिए मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान के विजेता डॉ. नीरज दइया को हाल ही में नानूराम संस्कर्ता साहित्य पुरस्कार की घोषणा हुई है। डॉ. दइया लंबे समय से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 22 सितम्बर 1968 को रतनगढ़ (चूरू) में जल्में कवि-आलोचक डॉ. दइया ने ‘निर्मल वर्मा के कथा-साहित्य में आधुनिकता बोध’ विषय पर पीअेच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आप माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर की राजस्थानी विषय पाठ्यक्रम समिति के संयोजक और राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की समितियों के सदस्य भी रहे। आपकी अनेक पुस्तके प्रकाशित हैं जिनमें प्रमुख है- लघुकथा-संग्रह ‘भोर सूं आथण तांई’ (1989), कविता-संग्रह ‘साख’ (1997), लांबी कविता ‘देसूंटो’ (2000), ‘पाछो कुण आसी’ (2015), समालोचना ‘आलोचना रै आंगणै’ (2011), ‘बिना हासलपाई’ (2014), बाल-कथा संग्रह ‘जादू रो पेन’(2012) और हिंदी कविता-संग्रै ‘उचटी हुई नींद’ (2013)। अनुवाद में : पंजाबी काव्य-संग्रह / अमृता प्रीतम ‘कागद अर कैनवास’ (2000), हिंदी कहाणी-संग्रह / निर्मल वर्मा ‘कागला अर काळो पाणी’ (2002), चौबीस भारतीय भाषाओं के कवियों की कविताओं का राजस्थानी अनुवाद ‘सबद नाद’ (2012), गुजराती यात्रा-वृत्तांत / भोलाभाई पटेल ‘देवां री घाटी’ (2013), नन्दकिशोर आचार्य की प्रतिनिधि कविताएं ‘ऊंडै अंधारै कठैई’ (2016), सुधीर सक्सेना की प्रतिनिधि कविताएं ‘अजेस ई रातो है अगूण’ (2016) और मोहन आलोक के पुरस्कृत राजस्थानी कविता-संग्रह का हिंदी अनुवाद ‘ग-गीत’ (2004)। संचयन एवं संपादन में : ‘मोहन आलोक री कहाणियां’ (2010), ‘कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां’ (2011), राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर से प्रकाशित 55 युवा कवियों की कविताओं का संग्रह ‘मंडाण’ (2012)। डॉ. नीरज दइया को साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से ‘बाल साहित्य पुरस्कार’, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर से अनुवाद पुरस्कार’, नगर विकास न्यास से ‘पीथळ पद्य पुरस्कार’, रॉटरी क्लब बीकानेर आदि अनेक मान सम्मान मिल चुके हैं।

Neeraj-Daiya-01-copyबीकानेर। राव मनोहरसिंह स्मृति न्यास, आईडाणा और साकेत साहित्य संस्थान आमेट द्वारा कांकरोली जिला राजसमंद में 23 दिसम्बर शुक्रवार को आयोजित काव्य त्रिवेदी संध्या में हिंदी, राजस्थानी और उर्दू के विभिन्न कवियों के साथ बीकानेर के मधु आचार्य ‘आशावादी’, नवनीत पाण्डे, राजेन्द्र जोशी और डॉ. नीरज दइया अपनी कविताओं की प्रस्तुति देंगे। कवि सम्मेलन में जोधपुर के डॉ. आईदानसिंह भाटी और सत्यदेव सवितेंद्र, उदयपुर के राव अजातशत्रु, चित्तोड़गढ़ के अब्दुल जब्बार, सोजत के वीरेंद्र लखावत, अहमदाबाद के नरपतदान आसिया सहित अनेक कवियों को आंत्रित किया गया है।
शनिवार को मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान मेधा मिलन पर्व 6 के सम्मान समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात लेखक डॉ. प्रीता भार्गव करेंगी जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कवि डॉ. आईदानसिंह भाटी, डॉ. ज्योतिपुंज एवं युगलबिहारी दाधीच शामिल रहेंगे। कार्यक्रम के संयोजक नारायणसिंह राव ने बताया कि इस बार राजस्थानी साहित्य के अंतर्गत डॉ. नीरज दइया को सम्मानित किया जाएगा। डॉ. दइया को मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान के अंतर्गत दस हजार रुपये की राशि तथा स्मृति चिह्न, प्रमाण पत्र आदि भेंट किए जाएंगे।
संस्थान प्रतिवर्ष हिंदी, उर्दू, संस्कृत और राजस्थानी साहित्य में चयनित साहित्यकारों को सम्मानित करता है तथा भागीरथसिंह पत्रकारित पुरस्कार भी संस्थान द्वारा दिया जाता है। डॉ. नीरज दइया से पूर्व मनोहर मेवाड़ साहित्य सम्मान से रीना मेनारिया, बस्तीमल सोलंकी, भेरुसिंह राव ‘क्रांति’ एवं माधव नागदा को सम्मानित किया जा चुका है। इस वर्ष के सम्मान समारोह में पूर्व पुरस्कृत साहित्यकार भी कांकरोली पहुंच रहे हैं।
डॉ. नीरज दइया को सम्मानित किए जाने के अवसर पर बुलाकी शर्मा, आनंद वी आचार्य, हरीश बी. शर्मा, देवकिशन राजपुरोहित, मंगत बादल, मदन गोपाल लढ़ा, राजूराम बिजारणियां, मीठेश निर्मोही, फारूख आफरीदी, जेबा रसीद, रजनी छाबडा, ओम नागर आदि ने बधाई और शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।

 

 

21 जनवरी, 2017 जयपुर साहित्योत्सव JLF में

21 जनवरी, 2017 जयपुर साहित्योत्सव JLF में कविता पाठ


आमंत्रण-पत्र : जयपुर साहित्योत्सव

 

सुरजाराम जालीवाला सृजन पुरस्कार

बीकानेर / 22 फरवरी / राजस्थानी और हिंदी के कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया को श्रीगंगानगर के ‘सृजन सेवा संस्थान’ की ओर से प्रतिवर्ष दिए जाने वाले ‘सुरजाराम जालीवाला सृजन पुरस्कार’ की घोषणा की गई है। उल्लेखनीय है कि अनेक पुस्तकों के वरिष्ठ रचनाकार डॉ. दइया को वर्ष 2016 के लिए राजस्थानी गद्य-साहित्य की उत्कृष्ट कृति का “खींव राज मुन्नीलाल सोनी” पुरस्कार रोटरी क्लब, नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान कालू, मनोहर मेवाड़ राजस्थानी साहित्य सम्मान, कांकरोली उदयपुर, फ्रेंड्स एकता संस्थान बीकानेर द्वारा सम्मान के बाद यह पांचवां पुरस्कार श्रीगंगानगर में माह अप्रैल-मई में संस्थान के वार्षिक समारोह में अर्पित किया जाएगा।

सृजन के सचिव डॉ. संदेश त्यागी ने बताया कि इस बार वर्ष 2016 के लिए यह पुरस्कार बाल-साहित्य केंद्रीत रखा गया था जिसके अंतर्गत बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक डॉ. दइया की बाल कहानियों की पुस्तक ‘जादू रो  पेन’ का चयन किया गया है। पुरस्कार निर्णायक मंडल में वरिष्ठ साहित्कार गोविंद शर्मा (संगरिया), हरीश बी. शर्मा (बीकानेर), अंजीव अंजुम (दौसा), शिवराज भारतीय (नोहर) तथा कृष्णकुमार ‘आशु’ (श्रीगंगानगर) शामिल थे। इस बार संस्थान द्वारा हिंदी बाल साहित्य के लिए सलूंबर की साहित्यकार श्रीमती विमला भंडारी की पुस्तक ‘सितारों से आगे’ का चयन किया गया है। दोनों बाल साहित्य के रचनाकारों को इससे पूर्व बाल साहित्य के अंतर्गत साहित्य अकादेमी नई दिल्ली का सम्मान भी मिला हुआ है।

नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान

साहित्य के माध्यम से सम्भव हैं मानवीय मूल्यों का संरक्षण – बादल

 डॉ नीरज दइया नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान से सम्मानित

कालू ( लूणकरनसर )/ 27 दिसम्बर/ ऐसे विकट समय में जब संवेदना की धारा सूखती जा रही हैं, साहित्य ही मानवीय मूल्यों के पोषण का माध्यम बन सकता है, ये उद्गार प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मंगल बादल ने व्यक्त किए। डॉ. बादल मंगलवार को कालू के मां जगदम्बा यात्रिगृह सभागार में नानूराम संस्कृर्ता साहित्य सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के जीवन में व्याप्त अविश्वास और तनाव से निजात पाने के लिए साहित्य के पठन-पाठन को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ. मदन सैनी ने कहा कि नानूराम संस्कर्ता ने ग्रामीण जीवन के सुख-दुख का जो अंकन किया हैं, वह बेजोड़ है। इस समारोह में डॉ. नीरज दइया को उनके राजस्थानी काव्य संग्रह ‘पाछो कुण आसी’ के लिए नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया। पुरस्कार के तहत डॉ. दइया प्रशस्ति पत्र, श्रीफल, शॉल, प्रतीक चिह्न, व पत्रम् पुष्पं अर्पित किए गए।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि राजस्थानी कहानी को स्थापित करने में संस्कर्ता का अवदान मील का पत्थर है, विशिष्ट अतिथि प्रमोद कुमार चमोली ने कहा कि नई पीढ़़ी को साहित्यिक विरासत से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। कार्यक्रम की शुरूवात मंचासीन अतिथियों द्वारा साहित्यकार नानूराम संस्कर्ता के तेल-चित्र पर माल्यापर्ण एवं पुष्पार्पण से की गई। कथाकार-कवि डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने नानूराम संस्कर्ता के साहित्यिक अवदान पर पत्रवाचन किया। कवि कहानीकार नवनीत पाण्डे ने राजस्थानी भाषाऔर साहित्य की चर्चा करते हुए डॉ. नीरज दइया के अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी में सबसे अधिक दूर तक पहचाने जाने वाले रचनाकार हैं। जगदीश प्रसाद सोनी ने सम्मानित होने वाले कवि डॉ. नीरज दइया का परिचय देते हुए पुरस्कृत काव्य-कृति ‘पाछो कुण आसी’ पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि ये कविताएं अपने प्रयोगों द्वारा कविता में बदलाव की सूचना भी देती है। कार्यक्रम में डॉ. गजादान चारण ने नानूराम संस्कर्ता के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर रामजीलाल घोड़ेला, डॉ गौरीशंकर, राजेन्द्र जोशी, उपसंरपच हजारीराम सारस्वत, सुरेश कुमार डूढ़ाणी, रामचन्द्र पुरोहित ने भी विचार व्यक्त किए।
आयोजन समिति की ओर से शिवराज संस्कर्ता ने सभी आगंतुकों का आभार जताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों द्वारा नानूराम जी के कार्यों को विस्तार दिए जाने का विश्वास दिलाया। आयोजकों की ओर से मंचासीन अतिथियों का मार्ल्यापण कर प्रतीक चिह्न भेंट कर अभिन्नदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि राजूराम बिजारणियां ने किया। समारोह में पूर्व संरपच रामकुमार सारस्वत, महाजन संरपच प्रतिनिधि सद्दाम हुसैन, उपसंरपच कमल संस्कर्ता, अधिवक्ता महिपाल सारस्वत, प्रधानाचार्य ओंकारनाथ योगी, कोषाधिकारी बजरंग शर्मा, चैनरूप सोनी, मालचन्द जोशी सहित बड़ी संख्या में कालू तथा आसपास के ग्रामों से गणमान्य जन मौजूद रहे।

लूणकरनसर/ 24 नवम्बर 16/ नानूराम संस्कर्ता राजस्थानी साहित्य सम्मान समिति की ओर से प्रतिवर्ष प्रदत्त ख्यातनाम साहित्यकार साहित्य महोपाध्याय नानूराम संस्कर्ता की स्मृति में ‘राजस्थानी साहित्य सम्मान’ के क्रम में इस बार बीकानेर के कवि डा. नीरज दइया को उनकी काव्य-कृति ‘पाछो कुण आसी’ के लिए दिया जाएगा। सम्मान समिति के संयोजक साहित्यकार रामजीलाल घोड़ेला एवं शिवराज संस्कर्ता ने बताया कि तीन स्वतंत्र निर्णायकों की ने साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मदन सैनी, वरिष्ठ उदघोषक व गजलकार राजेश चड्ढा तथा कवि-कथाकार डॉ. मदन गोपाल लढ़ा शामिल थे।

डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने बताया कि सम्मानित साहित्यकार डॉ. नीरज दइया राजस्थानी और हिंदी के वरिष्ठ कवि-आलोचक के रूप में पहचाने जाते हैं। आपकी विविध विधाओं में अब तक बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कविता, आलोचना और अनुवाद में समान गति रखने वाले डॉ. दइया को साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा बाल साहित्य लेखन, राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा अनुवाद कार्यों हेतु पुरस्कृत किया जा चुका है और इसी वर्ष रॉटरी क्लब द्वारा उन्हें आलोचना पुस्तक बिना हासलपाई पर राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदत्त किया गया है। सम्मान समिति के संयोजक साहित्यकार रामजीलाल घोड़ेला ने बताया कि डॉ. नीरज दइया ने नेगचार से संपादक के रूप में निराली पहचान बनाई तथा राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के लिए 55 युवा कवियां री कवितावां का संपादक ‘मंडाण’ उनका उल्लेखनीय कार्य है। डॉ. दइया वर्तमान में कविता कोश के अलाव अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं और फिलहाल वे बीकानेर के केंद्रीय विद्यालय में व्याख्याता हिंदी के पद पर सेवारत हैं।

शिवराज संस्कर्ता ने बताया कि यह सम्मान पूर्व में राजस्थानी के साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी, कवयित्री मोनिका गौड़, व्यंग्यकार नागराज शर्मा, निबंधकार डॉ कृष्णलाल बिश्नोई को अर्पित किया जा चुका है। इस बार डॉ. दइया को माह दिसम्बर में यह सम्मान भव्य समारोह ग्राम कालू में आयोजित कर अर्पित किया जाएगा। डॉ. नीरज दइया को ‘नानूराम संस्कर्ता साहित्य सम्मान’ की घोषणा पर युवा रचनाकार राजूराम बिजारणिया, कमल किशोर पिंपलवा, जगदीश नाथ भादू, नंदकिशोर शर्मा, राजकुमार गोगिया आदि ने खुशी जताई है।